#काश_की_तुम_समझ_पाती
काश ! मेरे अश्क़ भरे नयनों के
अल्फ़ाज़ को तुम समझ पाती ।
मेरे नयनों के अविरल
आब-के-चश्म को देख पाती ।
मैंने तेरे हर इक वादे को अपना किश्मत समझा
काश ! की तुम भी समझ पाती ।।
मेरा ग़ुनाह क्या था
मेरे इस आवारा दिल को समझा जाती ।।
मेरा फ़ितूर था कि मैं तेरे इज़हार-ए-मोहब्बत के लफ़्ज़ों में फ़ना हो गया
काश ! की तुम भी हो जाती।।
तेरे बेवफाई के बेरहम सलीके को मैं तो समझ गया
काश ! की मेरे प्यार के एहसास के गहराई को तुम समझ पाती ।।
मैंने देखा था सपना संग तेरे
तू मेरी हमसफ़र मैं हमसफ़र तेरा
मैंने समझा हक़ीकत सपना अपना
काश ! की तुम भी समझती इसको अपना ।।
काश ! मेरे अश्क़ भरे नयनों के
अल्फ़ाज़ को तुम समझ पाती ।
मेरे नयनों के अविरल
आब-के-चश्म को देख पाती ।
मैंने तेरे हर इक वादे को अपना किश्मत समझा
काश ! की तुम भी समझ पाती ।।
मेरा ग़ुनाह क्या था
मेरे इस आवारा दिल को समझा जाती ।।
मेरा फ़ितूर था कि मैं तेरे इज़हार-ए-मोहब्बत के लफ़्ज़ों में फ़ना हो गया
काश ! की तुम भी हो जाती।।
तेरे बेवफाई के बेरहम सलीके को मैं तो समझ गया
काश ! की मेरे प्यार के एहसास के गहराई को तुम समझ पाती ।।
मैंने देखा था सपना संग तेरे
तू मेरी हमसफ़र मैं हमसफ़र तेरा
मैंने समझा हक़ीकत सपना अपना
काश ! की तुम भी समझती इसको अपना ।।
© विवेक कश्यप किसलय
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