कहा किसने की बेटियाँ पराई होती है
अरे वो मूर्ख बता मुझे की बेटियाँ पराई कब होती है ।।
उसके जन्म के साथ घर में लक्ष्मी का वास होता हैं
उसके कोमल रुदन से घर गुंजइमान होता हैं ।।
उसके तुतलाती बोली पर भाई प्राण न्योछावर करता हैं
बहना कुछ बोले ना बोले भईया सब समझा करता हैं ।।
जब लगती है भूख प्यारी बिटियाँ को
माँ आती हैं दौड़कर सब काम छोड़कर
उसे देती है माँ अपने मातृत्व का सुख
और खुद में पाती है स्वर्ग का सुख ।।
माँ का बेटी से बेटी का माँ से
होता है गहरा नाता
अरे वो मूर्ख तुम्हें ये बात क्यों न समझ आता ।।
राखी में भाई के कलाई पर प्यार बांधती हैं
जुग जुग जियो भइया ऐसा वो प्यार बांधती हैं ।।
तुम कहते हो वो अपनी नहीं हैं
जा कर पुछो उस भाई से जिसकी बहन नहीं है ।।
राखी के दिन वो कितना रोता है
काश इक बहना होती ये सोचकर रोता हैं ।।
जिस माँ बाप ने कन्यादान नहीं किया
सच कहता हूँ उसने कुछ नही किया ।।
इतना प्यार, समर्पण , वात्सल्य कहाँ मिलेगा
अगर बेटियाँ नहीं होगी तो ये संसार नहीं चलेगा ।।
बेटियाँ ही इस भूधरा को स्वर्ग बनाती हैं
प्यार के अमृत से इसे बगीया को घर बनाती हैं ।।
तुमको आख़िर कैसे लगा कि ये पराई धन है
अरे ये तो माँ , बेटी , बहन हैं ।।
हाँ ये सच है कि वो बाबुल का घर छोड़ जाती है
बचपन के इस प्रेम बंधन को तोड़ जाती है ।।
ऐसा नहीं कि अब वो पराई हो गयीं
अब तो बिटिया दो दो घरों की दुलारी हो गई।।
कहना आप मेरा समझों
बेटियाँ है अपनी पराई नहीं
कर देगी न्योछावर वो सबकुछ अपना
कभी तो समझो उसको अपना।।
©विवेक_कश्यप_किशलय