Tuesday, 2 January 2018

सुर्ख़ ग़ुलाब

थीं पड़ी किताब के पन्नों में कहीं
वो ग़ुलाब निशानी प्यार की
देखकर यूं याद आया ग़ुलाब को
की कितने प्यार से दिया था आपको ।।
यौवन से पूर्ण लालिमा से परिपूर्ण
वो थी गुलाब लाल सी ।।
अब ढल गया यौवन
लालिमा लुप्त हुई
किताब के पन्नों के बीच
वो लाल गुलाब सुर्ख़ हुईं ।।

No comments:

Post a Comment