थीं पड़ी किताब के पन्नों में कहीं
वो ग़ुलाब निशानी प्यार की
देखकर यूं याद आया ग़ुलाब को
की कितने प्यार से दिया था आपको ।।
यौवन से पूर्ण लालिमा से परिपूर्ण
वो थी गुलाब लाल सी ।।
अब ढल गया यौवन
लालिमा लुप्त हुई
किताब के पन्नों के बीच
वो लाल गुलाब सुर्ख़ हुईं ।।
वो ग़ुलाब निशानी प्यार की
देखकर यूं याद आया ग़ुलाब को
की कितने प्यार से दिया था आपको ।।
यौवन से पूर्ण लालिमा से परिपूर्ण
वो थी गुलाब लाल सी ।।
अब ढल गया यौवन
लालिमा लुप्त हुई
किताब के पन्नों के बीच
वो लाल गुलाब सुर्ख़ हुईं ।।
No comments:
Post a Comment