देश मे मजहब के नाम पर यूनिवर्सिटी बन सकती है ,
अलग आयोग बन सकता है पर्सनल लॉ बोर्ड बन सकता है ।
लेकिन हिन्दू एक फल की किराना की या सब्जी के ठेले को अपने मन मुताबिक नाम नही दे सकता ।
संविधान क्या दो प्रकार का है ?
अगर सेकुलरिज्म इसी तरह चलता रहा तो एक दिन देश को निग़ल जाएगा ।
जय श्री राम
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